Posts

Showing posts from June, 2018

पहली जंग ए आजादी (अवध)लखनऊ

पहली जंग ए आजादी (अवध)  अवध विद्रोह जिसमें आम अवध वासीयों ने भाग लिया और क्रान्तिकरीयों को हर तरह से सहयोग दिया ।इस विद्रोह मे हिन्दु मुस्लिमों ने एक साथ अंग्रेजो से लोहा लिया ,बेगम हजरत महल की लम बन्दी के आगे  अंग्रेजो को कई स्थानों पर नाकों चाने चाबने पडे .  अवध की लड़ाई राजा जमीदारों तक ही सीमित नहीं थी । हर अवध वासी अपनी मातृ भुमि की रक्षा हेतु संग्राम मे कुद पड़ा ।क्या महिल क्या बच्चे सभी ने बढ़ चढ़ कर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से अग्रेजो से मुकबला किया यह लड़ाई हर मोहल्ले गॉवो मे लड़ी गई शयाद कोई गावों  हो जहा खुन न बहा हो  । बिना नेता के ही गॉवों मे अग्रेजों से लड़ाई लड़कर अग्रेजों को खडेला गया यु कहे हर र्मोचे पर पटखानी दियी गई  । अवध अग्रेजो के हाथ से छीन लिया और अग्रेजो को लखनऊ की रेजीडेसी में शरण लेने को बाध्य कर दिया ।  कुटनीति के  डेढ़ वर्ष के बाद अग्रेजो ने अवध पर फिर आधिकर कर लिया और हर जगह खुन की होली खेली ,विद्रोहीयों को जगह जगह पेड़ो पर  बिना (मुकदमा) सुनवई के फॉसी पर लटकया गया .  बड़े स्तर पर कत्ले  आम किये गय...

लोंकतन्त्र की हत्या (इमरजेन्सी

लोंकतन्त्र की हत्या   (इमरजेन्सी) आपातकाल  आजाद भारत की वो काली  तारीख थी । 25 जून 1975 की आधी रात जय प्रकास नरायण दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली के बाद गॉधी शांति प्रतिष्ठान मे आराम कर रहे थे . उसी समय जेपी को पुलिस गिरफ्तार कर थाने ले जाती है । सुबह होने तक देश के विपक्षी नेताओं को जेल में ठुस दिया गया जॉर्ज फ़र्नाडिस, अटल बिहरी बाजपेयी समेत समुचे विपक्ष के नेताओ को  जहॉ तहॉ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया  ।मीडिया तक पर हमला किया गया .जो नेता,प्रत्रकार बाचे वह अपना काम अन्डंर ग्राऊड होकर कर रहे थे । विरोंध करने वालों को (आंतरिक सुरक्षा कानून) मीसा के तहत जेल में डाल दिया गया .  देश के अन्दर भय अशांति का महौल चारों तरफ छा गया .श्रीमती इंन्दिरा गॉधी कानून के नाम पर मानमानी (तानाशाही) करती रही ।  संजय गॉधी ने तो सुन्दरीकरण के नाम पर दिल्ली के तुर्कमान गेट की झुग्गियों को तोंडकर एक ही दिन में ऊखाडं फेका । संजय गॉधी ने नसबन्दी के फैसाले को युध्द स्तर पर जबरदस्ती  लागु कराया । आधिकारीयों को साफ आदेश दिया गया आपना कोटा (लक्ष्य) पुरा कर...